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by Aakhyaanak
एक योद्धा की महागाथा।
बचपन में अपनी दादी और पिता को खोने का गहरा आघात, लुटियंस दिल्ली के बंद कमरे और फिर राजनीति के सबसे बेरहम अखाड़े में कदम। सालों तक जिसे देश की सबसे बड़ी ट्रोल फैक्ट्री ने मज़ाक समझा, जिसके अपने करीबी दोस्त एक-एक कर सत्ता की चाह में साथ छोड़ गए, और सामने था नरेंद्र मोदी की अपराजेय चुनावी मशीन का तूफ़ान—उस इंसान के भीतर क्या बीत रही थी?
जब सबने मान लिया कि खेल खत्म हो चुका है, तब शुरू हुई इतिहास की सबसे हैरतअंगेज़ वापसी।
सफ़ेद टी-शर्ट, बढ़ी हुई दाढ़ी और कन्याकुमारी से कश्मीर तक 4,000 किलोमीटर की तपस्या। बंद कमरों की साज़िशों से निकलकर जब वह आम हिंदुस्तानियों के सीने से लगा, तो नफ़रत के बाज़ार में ‘मोहब्बत की दुकान’ सिर्फ़ एक नारा नहीं, एक बगावत बन गई। यह कहानी सिर्फ़ राहुल गांधी की नहीं है; यह कहानी है एक ऐसे इंसान की जो हंसाए जाने के बावजूद झुका नहीं, टूटा मगर बिखरा नहीं, और जिसने अपने सबसे अंधेरे दौर में पूर्वजों की रूहानी आवाज़ सुनकर खुद को दोबारा गढ़ा।
क्या यह एक हारे हुए शहज़ादे का अंत था, या एक नए जननायक के उदय की शुरुआत?
पढ़िए ‘द अनब्रोकन रोड’—एक ऐसी दास्तान, जो आपकी हर पूर्वधारणा को हिलाकर रख देगी।